बुधवार, 27 फ़रवरी 2013

माँ तुझे एक बात बतानी है

माँ तुझे एक बात बतानी है 
मैं जान ना सका अब तक,
क्यों तेरी आँखों में रात सिमट आती थी,
बिस्तर की नमी तेरे कपड़ों से लिपट जाती थी,
भले ही अब तू फरिश्ता आसमानी है ,
माँ तुझे एक बात बतानी है ,
देख मेरे लड़खड़ाते कदम,
हर पल तेरा निकलता था दम,
मेरे आँसू जो दिख जाते तुझको,
बारिश तेरी पलकों से उमड़ आती थी,
क्यों दिखती परेशान सी तेरी पेशानी है ,
माँ तुझे एक बात बतानी है ,
तुझे उम्र भी नहीं दिखती अब आँखों से,
बूढ़ा नहीं बड़ा हूँ मैं पर वही प्यार झलकता तेरी बातों से,
माँ मेरे पास तू मेरी अपनी निशानी है ,
माँ तुझे एक बात बतानी है ,
याद नहीं करता तुझको तू सदा साथ है हर पल,
बस एक बार आ उंगली पकड़ मेरी साथ तू ले चल,
है तू ही जागीर मेरी माँ तू ही कहानी है
माँ तुझे एक बात बतानी है ,।

राजेन्द्र अवस्थी (काण्ड)

2 टिप्‍पणियां:

  1. मां के प्रति अत्यंत प्रेम और आदर भअव का वर्णन। सच में मां की कोई बराबरी नहीं कर सकता। 'बस एक बार आ उंगली पकड़ मेरी साथ तू ले चल' में मां हमेशा साथ रहने की मांग आदर च्यक्त करती है।
    drvtshinde.biogspot.com

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  2. विजय शिंदे जी, बहुत बहुत शुक्रिया आपका।

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