रविवार, 8 जुलाई 2012

बदली में ,

चाँद आज छुप गया था बदली में ,

अठखेलियाँ थी खूब जारी,
बदलियों के दिल भारी,
छुप छुप के आता था,
चाँद मन चुराता था,
बदली को नचाता चाँद उंगली में,
चाँद आज छुप गया था बदली में,

बदलियाँ बैरागी थीं,
प्रेम अगन लागी थी,
बदलियों का अकुलाना,
बैरी चाँद छुप जाना,
हो गई अमावस रात उजली में,
चाँद आज छुप गया था बदली मे,

चाँद ने बहुत रोका,
बदलियों को था टोंका,
है चाँदनी प्रिया मेरी,
संगिनी सदा चेरी,
मन हारा चाँद चाँदनी सी पगली में,
चाँद आज छुप गया था बदली में




2 टिप्‍पणियां:

  1. चाँद बस ऐसे ही लुका छुपी कर रिझाता रहता है , नीचे भी और ऊपर भी |

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  2. अमित जी ....सच कहा आपने .....अपनी प्रतिक्रिया से अवगत कराते रहें ....

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