रविवार, 5 अगस्त 2012

स्वागतम


अहा प्रात स्वागत है तेरा,

मन में मोती भर लाया हूँ,
कल ही रात तो घर आया हूँ,
हुआ प्रकाशित तम जीवन का,
भ्रमित नहीं चेतन मन मेरा,

अहा प्रात स्वागत है तेरा,
 कलुषित कल को छोड़ चुका मैं,
लिप्सा का दिल तोड़ चुका मैं,
छोड़ रहा इक इक पल मुझको,
टूटा कल्पित स्वप्न भी मेरा,

अहा प्रात स्वागत है तेरा,

आनंदों का स्वामी बन कर,
मुट्ठी में सुख सारे भर कर,
रिक्त है अंजुरी आ जा प्रियतम,
भर लूँ चेहरा तेरा,

अहा प्रात स्वागत है तेरा,

4 टिप्‍पणियां:

  1. रंजना जी ...आपका बहुत बहुत स्वागत है इस सुन्दर प्रभात में ....

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  2. उत्तर
    1. सर ,इस सुन्दर प्रभात में आपकी सुन्दर टिपण्णी के लिए धन्यवाद ..



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