शनिवार, 11 दिसंबर 2010

बेइज्जती....

बेइज्जती हम बेशर्मो का गहना
बिना बेइज्जती के क्या रहना
पूरा दिन जाता है खाली 
जब नहीं देता कोई गाली
मन उदास रहता है
खाली बकवास रहता है
बेशर्मी का ओढ़े लबादा
झूठा करता हू सबसे वादा
कोई भी बात हो
दिन हो या रात हो
जलालत है अपनी सौगात
झूठ है भाई, धोखा अपनी जात
रिश्तेदार है भ्रष्टाचारी
सगे सम्बन्धी अत्याचारी
पर कहना मत कभी मुझे नेता
गला हमने कभी किसी का  नहीं रेता
मेरी  इंसानियत सब को खलती है
शायद ये हमारी गलती है
के मै मानता हूँ  पूरी दुनिया को अपना घर
और अपने घर को तोड़ने से पहले लगता है डर
डर कही कोई बेइज्जती ना कर दे
सरे राह कोई इल्जाम मेरे सर ना धर दे
पर डरना और मरना एक जैसा है
न जाने ये संसार कैसा है
जो स्वाभिमान के साथ जीने भी नहीं देता
और सम्मान के साथ मरने भी नहीं देता
कभी हिजड़ा बना देता है और कभी कीड़ा
जीते जी देता है हर तरह से पीड़ा
मरने के बाद बन जाते है स्मारक
मौत चाहे जितनी भी रही हो ह्रदयविदारक
इसीलिए मित्रो बहुरूपिया चरित्रों
बेशर्मी के साथ जीना सीखो
बेइज्जती के बाद जी भर के चीखो
और दुनिया को बताओ मै नेता नहीं हूँ
इंसानियत के नाते सिर्फ देता हूँ लेता नहीं हूँ,,,...
                                                                   
                                                                   राजेंद्र अवस्थी...

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