रविवार, 31 अगस्त 2014

हाय-क्यूँ...!

1-जय गणेश,
छि: उत्तर प्रदेश,
गर्मी अशेष,

2-गर्मी पसीना,
गणेशोत्सव महीना,
मुश्किल जीना।

3-वो चूहा चोर,
कलियुग है घोर,
जोर का शोर।

4-सैलाबी आँसू,
बा बहू और सासू,
कहानी धाँसू।

5-प्रभु छेड़ो ना,
करने दो आराम,
दिल तोड़ो ना।

6-ऊपर देर,
मंदिर में अंधेर,
वक्त का फेर।

7-होली यूँ जली,

लपटे रंगीन थी,

सूनी थी गली।


8-पास पैसे थे,

पिचकारी लेनी थी,

फिर से गिने।

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