रविवार, 2 सितंबर 2012

वंश बेल

चाँद तो खुश है पास अब उसके लौट फ़िजा ना पायेगी,                                
काण्डा काण्डा करते करते फिर गीता मर जाएगी,
भंवरी फंसती रोज भंवर में भाँवर ना पड़ पाएगी,
मधुमिता को अमरमणी की जीत अमर कर जाएगी,
यश भारत का पंचम स्वर में सारी दुनियाँ गाएगी,
जिस भारत को माँ कहते हैं लाज वहाँ लुट जाएगी,                                     
नारी पूजित शक्ति रूपिणी प्रेम सलिल हुलसाएगी,
फिर भी अबला निर्बल दुर्बल शोषण सब सह जाएगी,
नारी ही नारी को जब तक मदद नहीं पंहुचाएगी,
दीन दशा नित दुष्कर स्थिति पल पल बढ़ती जाएगी,
सच मानो उद्धार जगत का नारी ही कर पाएगी,
गगन ह्रदय नारी का होता धरा स्वयं हो जाएगी,                                      
प्रेम मधुरता साहस सब पर सहज सदा बरसाएगी,
कैसी दुनियाँ कैसे ज्ञानी कौन सीख समझाएगी,
दुनियाँ होगी कैसे जब नारी ही मिटती जाएगी,
नारी पोषित नही हुई तो वंश बेल कुम्हलाएगी..................

शुक्रवार, 31 अगस्त 2012

बंधन


अब कसे बन्धन हम खोलते कहाँ हैं,
सह गए सब सितम कुछ भी बोलते कहाँ हैं,
कम हो या के ज्यादा प्रेम तो प्रेम है,
बन्द पलकों से कुछ भी हम तोलते कहाँ है
जब से चली है आँधी लूटमार की,
अरगनी के कपड़े भी अब डोलते कहाँ है,
पीने को मिलता नही पानी यहाँ पर,
फिर भी रक्त के कण अब खौलते कहाँ हैं,
सुनते है हो के मौन अपशब्द राह में,
दहाड़ सिंह सी कण्ठ मे घोलते कहाँ हैं,
सहिष्णुता भी अब लगा दी हमने दाँव पर,
स्नेह,प्रेम,भाईचारा जैसी दौलते कहाँ हैं,
भरी है कूट कूट कर निठुराई ज़हन मे,
संग सांस लेने की भी अब मोहलते कहाँ हैं,

बुधवार, 29 अगस्त 2012

छाया मेरी परमात्मा,


शांत निर्मल स्निग्ध छाया,
निश्छल निस्वार्थ निर्लेप पाया,
रहती मेरे ही सहारे,
मै हँसू तो दिल वो हारे,
जब गमों का साथ होता,
छाया का संताप रोता,
वख्त कुछ मै चिढ़ गया,
छाया से इकदम भिड़ गया,
प्रतिरूप क्यों मेरा बनाती,
साथ प्रतिपल क्यों निभाती,
छोड़ दो कुछ पल अकेला,
छाँट दो भ्रम का ये मेला,
मै हूँ जब तक तुम भी हो,
और साथ मेरे गुम सी हो,
मौन ही छाया रही,
स्तब्ध सी काया रही,
फिर मै समर्पित हो गया,
छाया को अर्पित हो गया,
बैठा हूँ अब छाया लिये,
रोशनी का क्षय किये,
दिन की दरिया छोड़ दी,
रात्रि से लौ जोड़ दी,
दिन है कैसा दिन कहो,
ऐसे दिन मे तुम रहो,
जिस दिन में छाया हो विलग,
उस दिन से रहता मै सजग,
तो रात्रि है दिन से भली,
है साथ छाया बावली,
छाया है मेरी आत्मा,
छाया मेरी परमात्मा,